स्त्रियो के बहुत से ऐसे रोग है जिनहे न तो वो किसी को बता पाती है और न ही उनका कोई उपचार हो पाता है। आयुर्वेद मे बहुत से ऐसे उपचार है जिनसे रोग से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है और इसके लिए किसी डॉक्टर के पास जाने की भी कोई जरूरत नहीं और न इसके कोई नुकसान है। आज आयुर्वेद इनहि उपचारो के बारे मे बात करते है।

मासिक धर्म खोलने हेतु आयुर्वेदिक उपचार
• कलिहारी की जड़ पानी मे पीसकर सिर पर लेप कर्णबे से बंद माहवारी खुल जाती है।

• लाल गुड़हल के फलों को काँजी के साथ पीसकर पीने से माहवारी खुल जाती है।

• मूली, गाजर और मेथी के बीजो को एक-एक छटाँक लेकर कूट-पीसकर छानकर रख ले। इस चूर्ण को 25-30 ग्राम की मात्रा मे अशोकारिष्ट
की 4 चम्मच के साथ रोजाना 2 महीने तक ले।
मासिक धर्म की अधिकता के उपचार हेतु आयुर्वेदिक दवाईया

• 20 ग्राम धनिया को 200 ग्राम पानी मे उबालें, जब 50ग्राम पानी रह जाए, तब छानकर पी ले। अधिक रक्त स्राव बंद हो जाएगा।

• अश्वगंधा का चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा मे लेकर उसमे बराबर मात्रा मे पीसी मिश्री या चीनी मिलकर ठंडे पानी के साथ खाएं।

• राल का महीन चूर्ण बनाकर उसमें बराबर मात्रा मे चीनी मिलकर खाये। अधिक रक्त स्राव बंद हो जाएगा।

• 10 ग्राम सफेदा काशगीरी व 1 ग्राम लाल गेरू ले, दोनों को अच्छी तरह मिलाकर बोतल मे भर लें। आवश्यकता पड़ने पर औषधि बताशे मे
भरकर खिलाये और ऊपर से थोड़ा दूध या पानी दे। यह एक अचूक औषधि है। तीन खुराक से अवश्य आराम मिलेगा।
स्त्रियो मे बांझपन के उपचार हेतु आयुर्वेदिक नुस्खे

• मासिक धरम के समय तुलसी के बीज चबाएँ या काढ़ा बना के पिये। निश्चय ही गर्भ धारण होगा।

• जायफल को कूट कर छानले और उसमें बराबर मात्रा मे मिश्री मिलकर ले। मासिक धर्म के बाद तीन दिन तक लगातार हथेली भर चूर्ण खाएं

• सुपारी और नागकेसर इनको बराबर मात्रा मे लेकर चूर्ण बना ले। 3 से 5 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ ले। गर्भ धारण होगा।

• पीपल की दाढ़ी को सुखकर महीन पीसकर कपड़े मे छानकर रख ले। और समान मात्रा मे कच्ची खांड मिलकर माहवारी के दिन से 25 ग्राम
खाये और पति को 10 दिन तक खिलाये। 10 दिन ब्रह्मचार्य का पालन करे और 11 वें दिन सहवास करें। अवश्य ही गर्भ धारण होगा।

• पुत्रजीवक पेड़ के जड़ को दूध मे पीसकर पीने से गर्भ ठहर जाता है।

गर्भ निरोध हेतु आयुर्वेदिक नुस्खे
• मासिक धर्म खत्म होने के बाद तीन दिन तक एक कप तुलसी का काढ़े का सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता है, और कोई हानिकारक प्रभाव
भी नहीं होता है। तुलसी के 10-15 पत्ते लेकर दो कप पानी मे उबाल ले। एक कप पानी रहने पर उतार लें और पिये।

• हल्दी की गांठ को पीसकर छानले। मासिक धर्म के पांचवे दिन 3 ग्राम की मात्रा मे सुबह-शाम ताजे पानी से ले। तीन दिन तक लगातार हर
महीने लेते रहने से ग्राभ धारण का भय नहीं रहेगा। (एक सप्ताह तक सहवास से परहेज रखे)

• अरंडी के बीज छील कर मासिक धार्म के पांचवे दिन एक बीज सुबह उठते ही ताजा पानी के साथ ले। एक साल तक गर्भ नहीं होगा।

• दो ग्राम फिटकरी को मैदा कए समान बारीक कर ले, और उसमें 12 ग्राम सफ़ेद वैसलिन अच्छी तरह मिला ले। संभोग से पहले गुप्तांग पर
लगा ले। 80 परसेंट तक सफलता मिलती है।

• बबूल के फूल, मासिक धरम मे गाय के दूध के साथ पीने से गर्भ धारण नहीं होता है।

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