चंद्रप्रभा वटी

चंद्रप्रभा वटी आयुर्वेद शास्त्र का एक ऐसा अद्भुत एवं गुणकारी योग या वटी है जो आज के जमाने मे स्त्री और पुरुष दोनों के लिए , किसी भी आयु मे उपयोगी एवं लाभकारी सिद्ध होता है। आजकल जिस तरह का खान पान, जीवनशैली, आचार- विचार लोगो मे पाया जा रहा है। उसके फलस्वरूप पैदा होने वाले कई तरह के विकारो को दूर करने मे चंद्रप्रभा वटी सफलतापूर्वक सक्षम एवं सिद्ध होने वाला योग या वटी है। ये वटी किसी भी आयुर्वेदिक दवाई की दुकान पर उपलब्ध है। परंतु आज हम इसकी बनाने की विधि के बारे मे जानेगे।

सामाग्री
कपूर, बच, नागरमोथा, चिरायता, चित्रक, गिलोय, दारुहल्दी, अतीस, देवदारु, पिपलामूल, धनिया, हरड़, बहेड़ा, आवंला, चावया, वायविडंग, गजपिपल, सौंठ, काली मिर्च, पीपल, सुवर्ण मक्षिक भस्म, सज्जीखार, जवाखर, सेंधा नमक, काला नमक, सांभर नमक यह सब 3-3 ग्राम। काली नीशोथ, दंतिमूल, तेजपता, दालचीनी, चोटी इलायची के दाने, वंश लोचन सभी 10-10 ग्राम। लोह भसम 20 ग्राम, मिश्री 40 ग्राम, शुद्ध शिलाजीत 80 ग्राम और शुद्ध गुग्गल 80 ग्राम।

आयुर्वेद ग्रंथो मे इन सब सामाग्री के अलावा चोटी इलायची के बीज, कबाबचीनी, गोखरू और अफेड चन्दन 3-3 ग्राम तथा बड़ी इलायची 10 ग्राम को भी शामिल किया गया है। इतने आइटम बढ़ाने से इस वाटी की उपयोगिता एवं गुणवत्ता और ज्यादा बढ़ जाती है।

निर्माण विधि
इन सभी दवाइयो को कूट कर पीस ले और खूब बारीक कर ले। अब सभी दवाइयो को एक साथ मिला कर थोड़ा थोड़ा गौमूत्र डालकर मिला ले। अच्छे से मिलकर चने के बराबर गोलियां बना ले।

मात्र एवं सेवन
2-2 गोली सुबह और शाम शहद मे मिला कर ले या दूध के साथ निगल ले।

उपयोग
इस अद्भुत वटी का मुख्य कार्य स्त्री और पुरुष संबंधी सभी प्रकार के यौन विकारो को नष्ट करना है। मर्द के शुक्र तथा स्त्री के आतर्व का उत्पादन करने वाले यौन अंग के विकारो को दूर करना तथा उनको बलवान बनाना। इसके सेवन से मूत्रदोष, शीघ्रपतन, धातुशिंता, पथरी, अंडव्रद्धि, कमर दर्द, बवासीर, स्त्री के गर्भ संबंधी विकार आदि सभी रोग विकारो को दूर करता है।

सार
चंद्रप्रभा वाटी पुरुष मे शुक्राणुओ की नवीन उत्पत्ति कर उनकी संख्या बढ़ाता है तथा रक्ताणुओ का शोधन कर नवनिर्माण करती है। उसी प्रकार चंद्रप्रभा वटी महिलाओ मे गर्भपात, अति सहवास, शारीरिक दुर्बलता, मासिक धर्म की अनिमियतता, गर्भाशय को ताकत देना आदि बीमारियो को दूर करने मे मदद करती है।

इसका सुबह और शाम लगातार 3-4 माह तक सेवन करना चाहिए। पुराने रोगो मे धैर्यपूर्वक, उचित परहेज करते हुए, 3-4 माह तक चंद्रप्रभा वटी का सेवन करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *