कैंसर रोग प्राक्रत्तिक चिकित्सा से ठीक हो सकता है। यह दावा कई रोगियो की चिकित्सा मे सफलता के बाद किया जा रहा है। किसी भी रोग मे रोगी के मानसिक सहयोग एवं शुद्ध विचार का रहना जरूरी है।

रोग परिचय

कैंसर एक अत्यंत पीड़ा देने वाला रोग है। इसमे एक ट्यूमर – गांठ फोड़ा के रूप मे शरीर के भिन्न- भिन्न भागो मे होता है। पहले यह गांठ फूलती है फिर फट जाती है और फूल गोभी के आकार मे सफ़ेद मवाद के साथ इसकी आक्रति बनती है। यह तो शरीर के ऊपरी भाग का स्वरूप है।

कारण

कैंसर के प्रमुख कारण- ध्रूमपान, मदिरा सेवन, तम्बाकू का सेवन, पान मसाला, गुटका। इनसे मुंह, होंठ, मसूड़े तथा जीभ का कैंसर होता है। कभी-कभी शरीर का पुराना घाव भी कैंसर का कारण बन जाता है। बहुत अधिक गरम प्रदार्थ भी आमाशय मे पहुँचकर आमाशयीक झिल्लियों को घायल कर देते है और कैंसर बन जाता है। कैंसर के हर रोगी को कोष्ठबद्धता की शिकायत होती है। जब इन लोगो की कोष्ठबद्धता बढ़ जाती है तभी कैंसर की शुरुआत होती है। कैंसर का एक और प्रमुख कारण कोई विशेष तनाव या चिंता भी हो सकता है।

कैंसर का उपचार

आज जिस तरह से कैंसर का डर लोगो मे फैला हुआ है वास्तव मे इसका कारण आधुनिक विज्ञान मे इसका इलाज़ केवल ऑपरेशन को ही मान लेना है। कैंसर के इलाज़ का यह कोई बहुत ज़्यादा सफल तरीका नहीं है। डॉ रोबर्ट बैल ने अपनी एक किताब मे लिखा है शल्य चिकित्सा से कभी कोई कैंसर आरोग्य नहीं हुआ है और न ही कभी होगा। इसके फलस्वरूप मृत्यु दर बढ़ गयी है। प्राक्रत्तिक चिकित्सा से कैंसर से सम्पूर्ण रूप से छुटकारा पाया जा सकता है। इसलिए केवल स्थानीय चिकित्सा करने से कोई लाभ नहीं। सपूर्ण शरीर की चिकित्सा किए बिना कैंसर का निवारण नहीं है। प्राक्रत्तिक चिकित्सा मे सम्पूर्ण शरीर के विकार निवारण किए जाते है। तो चलिये आज हम प्राक्रत्तिक चिकित्सा कुछ इलाजों के बारे मे जानते है।

प्राक्रत्तिक चिकित्सा

• पेट पर 30 मिनट तक ठंडी मिट्टी की पट्टी रखने के बाद नीम के पानी का एनीमा प्रतिदिन लगाए।

• ठंडे पानी का कति स्नान 10-10 मिनट का ले।

• धूप स्नान रोजाना 30mमिनट का ले। सिर पर गीला कपड़ा रखकर, सफ़ेद सुखी वस्त्र पहनकर या नंगे बदन धूप मे बैठे। शरिर पर धूप कम से
कम 30 मिनट पर यदि 1 घंटा भी बैठ सके तो और भी अच्छा होगा।

• शुद्ध खुली हवा का सेवन और प्रतिदिन गरम या ठंडे जल से स्नान करे।

• कैंसर के बाहरी फोड़ो या गांठ पर मिट्टी की पट्टी 3-4 बार, 20-30 मिनट एक बार रख कर बदलते रहे। दो पट्टियों के बीच 1 घंटे का अंतर
रखे। यदि कैंसर की गांठ मे शुरुआत मे ही मिट्टी की पट्टी रखी जाए तो गांठ दब जाएगी।
आहार

प्राक्रत्तिक चिकित्सा मे आहार ही औषधि है इस आधार पर आहार को इस क्रम मे रखा गया है।

• प्रतिदिन गाजर 100 ग्राम, अन्नानास 100 ग्राम, चकुंदर 100 ग्राम और आवाला 25 ग्राम इस सभी का रस निकाल ले और दिन मे दो बार दे।

• संतरा, मौसमी, अन्नानास, अंगूर का रस 2-3 बार दे।

• मौसम के अनुसार सब्जियों का रस दे, पालक 50 ग्राम, मेथी 25 ग्राम, बथुआ 25gग्राम इन सभी का रस रोजाना दिन मे एक बार ले।

• पेठे का रस 100-100 ग्राम दिन मे दो बार दे।

• गेहु का पौधा गमले मे लगाए और जब वो 8 इंच लंबा हो जाए तो उसका रस रोगी को पिलाये।

पपीता, चीकू, खरबूजा, आम, सेब, अनार, अंगूर आदि सभी मौसमी फल रोगी को जरूर दिये जाए। 15 से 30 दिन फलाहार रसांहार के बाद यदि रोगी मे जीवनी शक्ति पूर्ण हो तो नींबू शहद पानी 4-6 गिलास पिलाकर उपवास भी करना बहुत अच्छा रहता है। उपवास के बाद एक लंबे समय तक जूस, फल एवं अंकुरित अन्न, कच्चे नारियल की गिरि, सूखे मेवे, मुनक्का, किशमिश, अंजीर आदि भिगोकर खिलाये। इस रोग मे अपकाहार बिना आग का पकाया आहार जब तक रोगी ठीक नहीं होता खिलाते रहना चाहिए।

सारांश

यहा बताए हुए आहार के अतिरित्क्त कोई अन्य आहार जैसे – चावल, दाल, मिठाई, नमक, मिर्च, चीनी चाय या बाज़ार की कोई भी वस्तु न ले। कैंसर का पता लगते ही प्राक्रत्तिक चिकित्सा का सहारा ले और निर्भय होकर इसका मुक़ाबला करे। कुदरत के गोद मे अनेक बीमारियो के उपाय मौजूद है बास उन्हे समझने और अपनाने की जरूरत है, ऐसा कोई रोग नहीं है जिसकी औषधि प्रकर्ति मे मौजूद न हो। प्राक्रत्तिक चिकित्सा न केवल रोग खत्त्म होता है बल्कि कभी दुबारा लौट कर नहीं आता है। हमारे आयुर्वेद इन सभी औषधियो का खजाना है, इसे अपनाए और अपने जीवन को स्वथ्य और सुखी बनाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *