जिस महिला को बार-बार गर्भपात (Miscarriage) होता रहा हो, उस गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की उसका और गर्भस्थ शिशु का स्वस्थ्य अच्छा बना रहे। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की उसके गर्भ को किसी भी प्रकार का झटका, धक्का या कोई भी नुकसान ना हो। गर्भवती महिला को गर्भ लगते ही “नवमास चिकित्सा” का पालन शुरू कर देना चाहिए। इसका पालन करते हुए निम्नलिखित बचाव के उपाय प्रतिमास पूरे गर्भकाल मे सावधानी के साथ करते रहना चाहिए। ताकि गर्भपात से बचाव हो सके।

ऐसी महिला को 4-5 माह तक नियमित रूप से निम्नलिखित औषधियो का सेवन कर गर्भाशय को शक्तिशाली और दोषरहित करके ही गर्भधारण करना चाहिए।

तो आइये हम गर्भपात (Miscarriage) से बचाव के आयुर्वेदिक इलाज़ के बारे मे जानते है।

गर्भवती होने से पहले –

• प्रात: आरोग्यवर्धनी विशेष नं. 1 और अशोक वाटी 2-2 गोली पानी के साथ खाली पेट ले। भोजन से एक घंटे पहले टॉनिक एफ-22 के 2 बड़े
चम्मच भर आधा कप पानी मे डालकर ले। भिजन करके उठे तब आधा कप पानी मे अशोकारिष्ट, दशमूलरिष्ट और सुंदरी संजीवनी, इन तीनों
के 2-2 चम्मच डालकर पिये। ये चारो दवाए शाम के भोजन के समय भी ऐसे ही ले। रात को सोते समय हल्के गरम दूध के साथ सुबह वाली
दोनों गोलिया 2-2 ले। ऐसी महिला को मासिक ऋतु के दिनों मे पूरी तरह से विश्राम करना चाहिए।
गर्भवती होने के पहले महीने मे –

• पहले मास मे यदि पेट मे दर्द हो तो पदमाख, खस, लाल छादन इन तीनों को खूब पीस ले। आधा चम्मच पाउडर गाय के दूध के साथ सुबह
शाम सेवन करे।

• मुलेठी, देवदारु, क्षीरकाकोली इन तीनों को समभाग लेकर कूट पीसकर महीन चूर्ण बना ले। और सुबह शाम 2-2 छोटी चम्मच दूध के साथ
ले।

इन दोनों मई से कोई भी एक उपाय प्रथम मास मे शुरू कर दे।

गर्भवती होने के दूसरे महीने मे –

• नील कमल की जड़, मुलहठी, काकड़ासिंगी इन तीनों को सम मात्रा मे लेकर पीस ले और महीन चूर्ण बना ले। इस चूर्ण को 2-2 रत्ती, दूध
के साथ लेने से वेदना शांत होकर गर्भाशय सक्षम और बलवान बंता है जिससे गर्भपात (Miscarriage) होने का डर नहीं रहता है।

• काले तिल, शतावरी, मंजिष्ठा, पीपल की छाल सब को समभाग लेकर कूट पीसकर महीन चूर्ण बना ले। इस चूर्ण मे बराबर वजन मे मिश्री
मिला ले। इस चूर्ण की एक चम्मच सुबह शाम दूध के साथ पूरे मास तक ले। इससे गर्भपात (Miscarriage) होने की आशंका नहीं रहती है।

गर्भवती होने के तीसरे महीने मे –

• कमल की जड़, कमल केसर, चन्दन, कूठ, तगर – सब को 10-10 ग्राम लेकर कूट पीसकर महीन चूर्ण बना ले। इस चूर्ण की आधी चम्मच
लेकर पानी मे घोल ले और पी ले।

• क्षीर काकोली तथा सुगन्ध बाला – दोनों को पीसकर आधा चम्मच लेकर एक कप पानी मे घोल कर पी ले।

गर्भवती होने के चौथे महीने मे –

• नील कमल की जड़, हरे गोखरू, केसरु की छाल- सब को समभाग लेकर पीसकर महीन चूर्ण बना ले। सुबह और शाम दूध के साथ एक
चम्मच इस चूर्ण की रोजाना ले।

• मुलहठी, शियामल, ब्रहमदण्डी, अन्नतमूल- इन सबको समभाग लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना ले। सुबह और शाम दूध के साथ एक चम्मच इस
चूर्ण की रोजाना ले।

गर्भवती होने के पाचवे और छठे महीने मे मे भी वेदना हो और गर्भपात की आशंका होतो मिश्री के साथ पके हुए कैथ (कबीट) का गुदा पानी मे घोल कर पिये।

अथवा ये करे की गोखरू, मुलहठी, खरेटी, सहीजना – बराबर मात्रा मे लेकर कूट पीसकर 1-1 चम्मच चूर्ण दूध के साथ ले।

गर्भवती होने के सातवे महीने मे –

• यदि सातवे महीने मे भी वेदना होतो कसेरु, पुशकरमूल, सिंघाड़ा, नीलोफर – सब को समान मात्रा मे लेकर कूट पीसकर आधा चम्मच सुबह –
शाम दूध के साथ ले।

• 2 (मुन्नका) मुलहठी, कसेरु, कमल की जड़- इन सबको एक समान मात्रा मे लेकर महीन चूर्ण बना और आधा चम्मच सुबह – शाम दूध के
साथ ले।

गर्भवती होने के आठवे महीने मे –

• यदि आठवे महीने मे कष्ट हो तो मुलहठी, पद्द्माख, नागरमोथा, केसर गजपिपल, निलोत्त्पल इन सान को समान मात्रा मे लेकर आधा चम्मच
सुबह – शाम दूध के साथ ले।

• बेल की जड़ को दूध के साथ सिल पर घिसकर 1-2 चम्मच लेप तैयार कर ले। 2 चम्मच लेप दूध मे मिलकर पी ले।
गर्भकाल के नवे महीने मे क्षीरकाकोली का चूर्ण आधा चम्मच शहद मे मिलाकर सुबह-शाम चाट कर सेवन करे।

विशेष – यदि गर्भवती स्त्री गर्भकाल के तीसरा महिना शुरू होने पर सोमकलयान ध्रत का सेवन करना शुरू करके आठवा मास पूरा होने तक सेवन करती है तो वह गर्भ स्राव या गर्भपात से बची रह सकती है।

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